राजनाथ सिंह Vs रविदास मेहरोत्रा; लखनऊ पर सपा छुड़ा पाएगी 3 दशक पुराना BJP का कब्जा?

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लखनऊ सीट पर राजनाथ सिंह बनाम रविदास मेहरोत्रा

लोकसभा चुनाव 2024 का बिगुल कल बजने वाला है। निर्वाचन आयोग द्वारा तारीखों का ऐलान करते ही चुनाव अपने पूरे रंग में आ जाएगा। कहा जाता है कि दिल्ली की सत्ता की रास्त उत्तर प्रदेश से होकर जाता है। जब बात हो उत्तर प्रदेश की तो यहां की राजधानी लखनऊ, राजनीति का हॉटस्पॉट बन जाती है। इसी लखनऊ लोकसभा सीट पर इस बार का लोकसभा चुनाव बेहद दिलचस्प होने वाले हैं। लखनऊ से भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह फिर से लड़ रहे हैं और उन्हें टक्कर देने समाजवादी पार्टी ने रविदास मेहरोत्रा को मैदान में उतारा है। जहां एक ओर राजनाथ सिंह भाजपा के वरिष्ठतम नेता माने जाते हैं तो वहीं रविदास मेहरोत्रा सपा के कद्दावर नेता हैं। लिहाजा लखनऊ लोकसभा सीट पर क्यों मुकाबला बेहद रोचक होने वाला है, ये हम आपको बताते हैं-

लखनऊ पर 3 दशकों से भाजपा का कब्जा

लखनऊ लोकसभा क्षेत्र भाजपा के लिए कितना अहम है, इस बात अंदाजा आप ऐसे लगा सकते हैं कि इस सीट पर साल 1991 में दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने जो जीत का झंडा गाढ़ा, कमल का वह ध्वज आजतक लहरा रहा है। तब से सपा और कांग्रेस ने कितने ही प्रत्याशियों को लखनऊ से लड़ाया, लेकिन भाजपा तब से इस सीट पर अजेय है। लखनऊ, असल में पूर्व पीएम और भाजपा के संस्थापक सदस्य रहे अटल बिहारी बाजपेयी की भी कर्मभूमि रहा है।

लखनऊ बीजेपी का गढ़ इसलिए माना जाता है क्योंकि यहां भाजपा पिछले 8 लोकसभा चुनाव जीतती आ रही है। 1991 से 5 बार अटल बिहार बाजपेयी यहां से सांसद रहे। एक बार लालजी टंडन और 2014, 2019 से लगातार दो बार राजनाथ सिंह सांसद रहे हैं। तीसरी बार फिर बीजेपी ने राजनाथ सिंह पर ही भरोसा जताया और लखनऊ सीट से मैदान में उतारा है। बता दें कि लखनऊ सीट के वोटर इसे आज भी अटल जी की ही सीट मानते हैं और यही वजह है कि यहां से भाजपा जिस प्रत्याशी को भी उतारे, वह हर बार बहुत बड़े मार्जिन से जीतता है। 

लखनऊ से हैट्रिक मारने को अग्रसर राजनाथ सिंह  

राजनाथ सिंह साल 2000 में जिस उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे, अब उसी प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सांसदी के लिए तीसरी बार दंभ भर रहे हैं। इस सीट पर राजनाथ साल 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों से जीतते आ रहे हैं और 2024 के लिए कमर कस चुके हैं। बता दें कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 2014 के लोकसभा चुनाव में 5 लाख 61 हजार से ज्यादा वोट हासिल किए थे। तब उनके खिलाफ कांग्रेस की रीता बहुगुणा जोशी मैदान में थी जिन्हें सिर्फ 2 लाख 88 हजार हजार वोट मिले थे। 2014 में राजनाथ सिंह ने लखनऊ से 2 लाख 77 हजार से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की थी। इसी तरह 2019 के लोकसभा चुनाव में राजनाथ सिंह ने 3 लाख 47 हजार से ज्यादा वोटों से बीजेपी का विजयी ध्वज फहराया था। 2019 के लोकसभा चुनाव में राजनाथ सिंह को 6 लाख 33 हजार से ज्यादा वोट मिले थे।

राजनाथ सिंह का हैवीवेट पोर्टफोलियो

नेता के तौर पर देखें तो राजनाथ सिंह का खुद का पोर्टफोलियो बहुत भारी भरक है। साल 1977 में राजनाथ पहली बार विधायक बने थे। 1983 में उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश सचिव, 1984 में भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष, 1986 से 1988 तक भाजपा युवा मोर्चा के महासचिव और 1988 में राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। 1988 में उत्तर प्रदेश विधानसभा में एमएलसी के लिए निर्वाचित हुए और 1991 में शिक्षा मंत्री बने। 1994 में राज्यसभा सांसद बने। 1997 में राजनाथ ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का कार्यभार ग्रहण किया। 1999 को वह केन्द्रीय परिवहन मंत्री बने। 2000 को राजनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और बाराबांकी के हैदरगढ़ निर्वाचन क्षेत्र से दो बार विधायक चुने गए। 2002 में उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव का पद संभाला। 2003 को उन्होंने केन्द्रीय कृषि मंत्री एवं खाद्य सुरक्षा का भार संभाला। 2004 में एक बार फिर राजनाथ भाजपा के महासचिव बने। 2005 में राजनाथ सिंह ने भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यभार ग्रहण किया। इसके बाद वह 2009 में उत्तर के गाजियाबाद से सांसद चुने गए। फिर 2014 में लखनऊ से जीतकर सांसद बने और गृह मंत्री के रूप में काम किया और 2019 के चुनाव में फिर लखनऊ से जीते और रक्षा मंत्रालय संभाल रहे हैं। 

मुलायम के करीबी रहे मेहरोत्रा का बड़ा वर्चस्व 

वहीं लखनऊ की हाईप्रोफाइल लोकसभा सीट पर राजनाथ सिंह के खिलाफ समाजवादी पार्टी ने विधायक रविदास मेहरोत्रा को प्रत्याशी बनाया है। रविदास मेहरोत्रा 2022 के विधानसभा चुनाव में लखनऊ मध्य से विधायक बने थे। गौर करने वाली बात ये है कि पिछल विधानसभा चुनावों में रविदास मेहरोत्रा ने मोदी-योगी लहर के बावजूद लखनऊ मध्य से भाजपा प्रत्याशी को 10 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था। सपा प्रत्याशी रविदास मेहरोत्रा पहली बार 1989 मे जनता दल के टिकट पर लखनऊ पूर्वी से विधायक बने थे। साल 2012 में लखनऊ मध्य से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। इतना ही नहीं रविदास मेहरोत्रा अखिलेश सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। लेकिन कैबिनेट मंत्री होने के बावजूद वह 2017 के विधानसभा चुनाव में लखनऊ मध्य से चुनाव हार गए थे। अब अखिलेश यादव ने रविदास को लखनऊ सीट से उम्मीदवार बनाया है और राजनाथ की हैट्रि्क तोड़ने का मिशन दिया है। 

इनके पोर्टफोलियो की बात करें तो सपा के लोकसभा उम्मीदवार रविदास मेहरोत्रा राजनीति के बड़े खिलाड़ी माने जाते हैं। मेहरोत्रा कॉलेज के दिनों से ही राजनीति में सक्रिय हैं। रविदास मेहरोत्रा के नाम एक अनोखा रिकॉर्ड भी है। वह 251 बार जेल जाकर लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में सबसे ज्यादा जेल जाने के रिकॉर्ड दर्ज करा चुके हैं। रविदास ने लखनऊ के केकेसी विद्यालय से पहली बार छात्रसंघ का चुनाव लड़े और जीतकर उपाध्यक्ष बने। इसके बाद उनकी राजनीति का सफर शुरू हो गया। रविदास की मुलायम सिंह यादव से मुलाकात हुई और फिर यही से रविदास ने कभी भी राजनीति में पीछे मुड़कर नहीं देखा। इतना ही नहीं रविदास मेहरोत्रा को पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव का करीबी माना जाता था। यही वजह है कि सपा सरकार में उन्हें अहम विभाग सौंपे गए थे।

लखनऊ लोकसभा सीट का समीकरण

लखनऊ लोकसभा क्षेत्र में 5 विधानसभा सीटें आती हैं – लखनऊ पश्चिम, लखनऊ उत्तरी, लखनऊ पूर्वी, लखनऊ मध्य और लखनऊ कैंट। इनमें से 2022 के विधानसभा चुनावों में 3 सीटों पर बीजेपी ने कब्जा किया था। 2011 मतगणना के आंकड़े मानें तो लखनऊ की लगभग 45 लाख की आबादी है। 2019 के आंकड़े के अनुसार, लखनऊ में कुल 19.37 लाख वोटर हैं, जिसमें पुरुषों 11 लाख के करीब हैं और  लगभग 9 लाख महिला वोटर हैं। वहीं लखनऊ के जातीय समीकरणों पर गौर करें तो यहां करीब 71 फीसदी आबादी हिंदू समाज से है। इसमें 18 प्रतिशत मतदाता राजपूत और ब्राह्मण हैं और बाकी में अन्य जातियां शामिल हैं। इसके अलावा लखनऊ लोकसभा क्षेत्र में करीब 18 प्रतिशत मुस्लिम वोटरों का प्रभाव है। 28 फीसदी के करीब ओबीसी समाज की संख्या है। लखनऊ संसदीय सीट पर अनुसूचित जन जातीय 0.2% और अनुसूचित जाति लगभग 18 फीसदी के करीब है।

लखनऊ सीट पर पिछले चुनाव में हारी थी सपा

लखनऊ सीट पर पिछले लोकसभा चुनाव की बात करें तो यहां राजनाथ सिंह ने 6 लाख 33 हजार से ज्यादा वोट हासिल किए थे जबकि सपा कैंडिडेट पूनम सिन्हा, जो की शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी हैं, मात्र 2 लाख 85 हजार वोट मिले थे। इस चुनाव में राजनाथ सिंह 3 लाख 47 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से चुनाव जीता था। पिछले लोकसभा चुनाव में लखनऊ सीट पर लगभग 55 फीसदी वोटिंग हुई थी और बीजेपी को एक बड़ी जीत मिली थी। यहां से तीसरे नंबर पर कांग्रेस रही थी, जिसके आचार्य प्रमोद कृष्णम को 1 लाख 80 हजार 11 वोट मिले थे। पिछले चुनाव में राजनाथ सिंह ने समाजवादी पार्टी को 3 लाख, 47 हजार से अधिक वोटों के अंतर से हराया था।

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